कहते है कि मौत, प्रलय और समस्या देखकर नहीं आती और न ही इनके आने का कोई समय होता है, हमे नहीं पता कि दुनिया का अंत कब होगा ? या फिर होगा भी या नहीं ? लेकिन हम इतना ज़रूर कह सकते है कि जिसका जन्म हुआ है उसका अंत भी एक न एक दिन अवश्य होता है |

दोस्तों आज के इस लेख में हम उन तथ्यों के बारे में बात करेंगे जो पृथ्वी के विनाश (How the Earth will be Destroyed ? ) का कारण बन सकती है | पृथ्वी की संरचना लगभग 4.5 करोड़ साल पहले हुयी थी और पृथ्वी हमारे सौरमंडल का तीसरा और केवल एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसपर जीवन संभव है |

वैज्ञानिको के मुताबिक पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को करीब 3.5 अरब साल हो चुके है और तब से लेकर आजतक पृथ्वी ने कई प्राकृतिक और मानवीय आपदाये झेली है और इन कारणों की वजह से पृथ्वी के ख़त्म होने की आशंका को नाकारा नहीं जा सकता |

तो आइये एक नज़र डालते है उन तथ्यों पर जो पृथ्वी के अंत (How the Earth will be Destroyed ? ) का कारण बन सकती है |

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How the Earth will be Destroyed ?

वैज्ञानिक मान्यता –

वैज्ञानिको को आशंका है कि आने वाले समय में एक्स नामका एक ग्रह धरती के काफी पास से गुजरेगा और अगर इस दौरान इसकी टक्कर पृथ्वी से हो गयी तो पृथ्वी को नष्ट होने के कोई नहीं बचा सकता |

लेकिन कई वैज्ञानिक ऐसे भी है जो इस बात से साफ इंकार करते है, उनका मानना है कि ब्रह्माण्ड में ऐसे कई ग्र और उल्का पिण्ड है जो कई बार धरती के नजदीक से गुजर चुके है और उन्हें अभी इनसे कोई खतरा नज़र नहीं आया |

हालांकि 1994 में एक ऐसे घटना घटी थी जब पृथ्वी के बराबर के 10 – 12 उल्कापिंड बृहस्पति ग्रह से टकरा गए थे और तब वह का नज़ारा किसी महाप्रलय से काम नहीं था जिसकी वजह से उस गृह की आग और तबाही आज तक शांत नहीं हुयी है | इसलिए वैज्ञानिक मानते है कि जो बृहस्पति ग्रह के साथ हुआ वह यदि भविष्य में कभी पृथ्वी के साथ हुआ तो पृथ्वी को नष्ट होने से कोई नहीं बचा सकता |

ज्वालामुखी का फटना –

दोस्तों ज्वालामुखी का फटना भी पृथ्वी के विनाश का एक कारण बन सकता है | 1816 में इंडोनेशिया में स्थित माउन्ट अम्बोरा नामके ज्वालामुखी ने भारी तबाही मचाई थी, जिसकी वजह से 1.5 लाख लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था |

दोस्तों यह तबाही केवल एक सामान्य ज्वालामुखी यानि की वोल्केनो (Volcano) के वजह से हुयी थी | सोचिये अगर एक सामान्य ज्वालामुखी की जगह एक सुपर वोल्केनो (Volcano) फट जाये तो पृथ्वी पर तबाही का आलम क्या होगा?

सुपर वोल्केनो के फटने के दौरान ज्वालामुखी से जो लावा निकलेगा, वो ब्रिटेन के आकर से लगभग 8 गुना बड़ा होगा और इस वोकानो के फटने से आसमान में बहुत बड़े काळा धुएं के बादल बन जायेंगे जो सालो तक सूरज की किरणों को धरती पर आने से रोके रखेंगे, जिसकी वजह से पृथ्वी से जीवन गायब होने लगेगा और धरती का विनाश होना प्रारम्भ हो जायेगा |

महाभारत की गाथा –

महाभारत में भी कलियुग के अंत में प्रलय होने का जिक्र है यह प्रलय धरती पर लगातार बढ़ रही गर्मी से होगा| महाभारत में लिखा है कि कलियुग में अंत में सूर्य का तापमान इतना बढ़ जायेगा कि समुन्द्र और नदियाँ सुख जाएगी | बारिश पूरी तरह से बंद हो जाएगी और सूर्य की ये प्रचंड अग्नि धरती को पाताल तक भस्म कर देगी | सब कुछ जलकर खाक हो जायेगा, इसके बाद फिर 12 वर्षो तक लगातार बारिश होगी जिसके फलस्वरूप सारी धरती जलमग्न हो जायेगी और धीरे धीरे फिर से इस धरती पर जीवन की शुरुवात होगी |

नष्ट होते सितारे (Gama Rays) –

रात में टिमटिमाते हुए तारो को देखना किसे पसंद नहीं ? लेकिन क्या आपको पता है कि ये टिमटिमाते हुए तारे पृथ्वी के नष्ट होने का कारण बन सकती है, जी हा, जब दो नष्ट होते हुए सितारे आपस में मिलने लगते है तो उनमे से एक गामा किरण निकलती है जोकि इतनी शक्तिशाली और चमकदार होती है कि हमारी धरती को पालक झपकते ही नष्ट क्र सकती है |

वैसे ब्रह्माण्ड में यह प्रक्रिया हमेशा होती रहती है लेकिन यह प्रक्रिया हमारे सौरमंडल से इतनी दूर होती है कि हमारे धरती पर इसका कोई असर नहीं पड़ता इन दो नष्ट होते हुए सितारों के मिलने से इतनी गामा किरणे निकलती है कि इनकी ऊर्जा हमारे सूर्य से लगभग 1 करोड़ अरब गुना ज्यादा होती है | अगर ये प्रक्रिया हमारी धरती से 1000 प्रकाशवर्ष की दुरी पर हो तो इस शक्तिशाली किरणों से हमारी धरती एक पल में जलकर नष्ट हो जाएगी |

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